रचनाएँ

शनिवार, 18 जुलाई 2009

तुम्हारा साथ मिल जाए .................

तुम्हारा साथ मिल जाए तो सब दुःख भूल जाऊँगा ......
वो कहता था तुम्हें हर सूरत में अपना बनाऊंगा .....

न्योछावर खवाब करदूंगा तुम्हारे हर इशारे पर ....
कभी पीपल की छावं में कभी नदिया किनारे पर .....
मुझे तुमसे मोहब्बत है मैं लोगों को बताऊंगा ....
वो कहता था तुम्हें हर सूरत में अपना बनाऊंगा .....

मेरी ठंडी सी तन्हाई सुलगती रात जैसी हो .....
मुझे बस साथ ले जाओ भले बरात जैसी हो .....
तुम्हे सुर्ख जोड़े में मैं दुल्हन बना कर लाऊंगा ...
वो कहता था तुम्हें हर सूरत में अपना बनाऊंगा .....

मैं चहुँगा तुम्हें जाना ...उमंगो से उजालो तक
खुदी के चाह से लेकर हमारे सात जन्मों तक
मुझे तुमसे मोहब्बत है में लोगों को बताऊंगा .....
वो कहता था तुम्हें हर सूरत में अपना बनाऊंगा .....

5 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

bahut hi sundar ......bhawanao ka adbhood prastutikaran..

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना !!

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया है!

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर ने कहा…

आपका ब्लोग अच्छा लगा
आभार/शुभमगल
मुम्बई टाईगर
हे प्रभु यह तेरापन्थ

बेनामी ने कहा…

very good

 

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