रचनाएँ

शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

मेरा दिल करता है

मेरा दिल करता हे की मैं भी चिडिया बन जाऊ
उपर आस्मां मैं उड़ जाऊ बदलो मैं छूप जाऊ
सबकी नजरो से छूप जाऊ किसी को नजर न आंऊ
अपने प्यारे से बचपन को याद करके खुश हो जाऊ

इस मतलबी दुनिया से दूर ही रहू
जादू करना सिख जाऊ छड़ी घुमाऊ और
अमीरों की तिजोरी से कुछ पैसा गरीबो को दे आऊं
मिलावट करने वालो को खूब रूलाऊ

अमृता जैन

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा विचार!!

 

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