रचनाएँ

बुधवार, 26 अगस्त 2009

चम्पतिया आ गयी, चम्पतिया

छोटी की घटना बड़ी हो गयी
मरी हुई एक बुढ़िया खड़ी हो गयी
उसे देखकर एक बूढा डर गया
थोडी देर बाद वो मर गया

लाश देखकर एक चिल्लाया
चम्पतिया आ गयी, चम्पतिया
मैंने पूछा ये चम्पतिया कौन है
वो बोला चम्पतिया को नही जानते
ये वही है जो कभी बिल्ली तो
कभी कुत्ता बन जाती है
कभी भूत बनकर लोगो को डराती है
अंधेरे का फायदा उठाकर
किसी को भी मार जाती है

मैं बोला ये क्या करते हो
क्यो इस बात से डरते हो
चम्पतिया का पता नही
ये तो कोरी बकबास है
एक बूढा जो निपट गया था
ये तो उसकी लाश है

2 टिप्‍पणियां:

Nirmla Kapila ने कहा…

गणपति पूजा बहुत पसंद आयी रचना भी अच्छी है मगर इसके साथ फोटो का तालमेल कुछ जचा नहीं बधाई

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Badhiya hai.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

 

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