रचनाएँ

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

पाँच दिनों का त्यौहार


चम चम करती दिवाली
घर घर दीपक जलते हैं
द्वार द्वार सजी रंगोली
रंग अनेक मन हरते हैं
उठती रसोई से सुगंध मनमोहक
लड्डू बर्फी बालूसाही
कितने पकवान कितनी मिठाई
फुलझडी की तड तड संग किलकारियां
फुवारों के संग चकरियां प्यारियां
वो देखो बदमाश हरा बम्ब लाया
कितने जोर का धमाका मचाया
मिलते लोगों से देते बधाई
हर मुख पर खुसी लहराई
चम चम करती लक्ष्मी
संग शारदा गणेश भी लायी
दर्दिरता, अज्ञान, विघ्न हरेंगे
अर्चित हो हम पर अनुग्रह करेंगे
उनके लिए दीप जलाओ
आनंदित हो घर सजाओ
एक मेरी थी प्यारी बेहेना
स्वर्ग में है, कोई उसको कहना
लक्ष्मी संग तुम भी आना
घर में पग फिर से धरना
आँखों से सूरत हटती नहीं
प्यारी अटखेलियाँ बिसरती नहीं
काश तुम संग हमारे होतीं
ऑंखें दीपो में रोतीं
इस्वर उसे सम्बहले रखना
स्वर्ग के सब प्राप्य वास्तु उसको देना.

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