रचनाएँ

शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009

प्यारे बापू

9 टिप्‍पणियां:

सुनीता शानू ने कहा…

चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति.
गांधी जी ने लाठी भी कभी नहीं चलाई.
मेरा बहुत बहुत आशीर्वाद आपको.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

सर अगर इस कविता के रचयिता का नाम देते तो ज़्यादा अच्छा होता। वैसे ये मेरे दोस्त आदित्य की लिखी हुई है।


सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर

सुनीता शानू ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सुनीता शानू ने कहा…

नमस्कार आप सभी जिस ब्लॉग पर बार-बार कमैंट दे रहे हैं वो जनाब इसके हकदार नही हैं...
यह मेरे बेटे आदित्य की लिखी कविता है जो उसने चार साल पहले लिखी थी कृपया अपना अमूल्य कमैंट देने से पूर्व पढ़ लीजिये किसी बच्चे के साथ नाइंसाफ़ी तो नही है यह?

Udan Tashtari ने कहा…

रचनाकार को उसका क्रेडिट तो दिजिये, जनाब!!

सतीश सक्सेना ने कहा…

यह बेईमानी है ....

 

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