खूबसूरत है .......

खूबसूरत है वो लब जिन पर दूसरों के लिए कोई दुआ आ जाए,

खूबसूरत है वो मुस्कान जो दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए,

खूबसूरत है वो दिल जो किसी के दुख मे शामिल हो जाए,

खूबसूरत है वो जज़बात जो दूसरो की भावनाओं को समज जाए,

खूबसूरत है वो एहसास जिस मे प्यार की मिठास हो जाए,

खूबसूरत है वो बातें जिनमे शामिल हों दोस्ती और प्यार की किस्से, कहानियाँ,

खूबसूरत है वो आँखे जिनमे किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए,

खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए,

खूबसूरत है वो सोच जिस मैं किसी कि सारी ख़ुशी झुप जाए,

खूबसूरत है वो दामन जो दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए,

खूबसूरत है वो किसी के आँखों के आसूँ जो किसी के ग़म मे बह जाए......

कुछ यादें

वो यमुना का पानी, वो केन की रवानी,
वो भोला सा बचपन, वो अल्हड़ जवानी,

वो सरसों के फूल, वो गेहूँ की फसलें,
वो पुरखों का घर, वो चिड़ियों की नस्लें,

वो सोने का सूरज, वो चाँदी का चंदा,
वो सावन की मस्ती, वो झूलों का फंदा,

वो चमकते सितारे, वो भटकते से मोर,
वो अखाड़े का दंगल, वो पतंगों की डोर,

वो जाड़े की ठंडक, वो गर्मी की लू,
वो बीमारी का दौर, वो हैज़ा वो फ़्लू,

वो भैंसों का दूध, वो बैलों की घंटी,
वो संकरे से रस्ते, वो पतली पगडंडी,

वो पीपल का पेड़, वो बरगद की छाँव
वो मिट्टी की खुशबू, वो पुरखों का गाँव

माँ का दर्द

माँ का दर्द तो माँ ही जाने
माया तू क्या जानेगी
बेटे को तो फसा दिया है
अब कब तू मानेगी
माँ को बेटे से दूर करके
तू कब तक बच पायेगी
माँ का दर्द तो माँ ही जाने
माया तू क्या जानेगी
रासुका को बना खिलौना
तानाशाही चलाएगी
जिस दिन हाथी गया हाथ से
दूर खड़ी चिल्लाएगी
माँ का दर्द तो माँ ही जाने
माया तू क्या जानेगी

'निर्भय'

चुनावी संग्राम में जनता


इस बार चुनाव का हाल निराला है
प्रचार-प्रसार पर रख कर नज़र
चुनाव आयोग ने सबको धो डाला है
चुनावी माहौल में जुट गए पार्टियों के नेता
फिर चुप क्यों बैठे हमारे अभिनेता
वो भी शुरू हो गए इस चुनावी महा संग्राम में
नेता बन गए तो ठीक नही तो मस्त है अपने काम में
चारो तरफ़ यात्राओं के माहौल में
हाथी, साइकिल, पंजा और कमल का फूल है
प्रचार की सभाओं में भीड़ की धूल है
अपने अपने वादों में नेताओं की होड़ है
नाते रिश्ते छोड़ के अब तो वोटो की दोड़ है
कैसे भी मिल जाए हमें संसद की ये सत्ता
कुछ भी करना पड़ जाए कोई फर्क नही अलबत्ता
हद में रहकर बोल रहे है अबतो सारे नेता
जाने किस गलती पर खा जाए उन्हें आचार संहिता
इन सब में मतदाता का हर हाल बेहाला है
इस बार चुनाव का हाल निराला है

'निर्भय'

तुम्हारे इश्क में

गरीबी ने किया गंजा नहीं तो चांद पर जाता!
तुम्हारी मांग भरने को सितारे तोडकर लाता!
बहा डाले तुम्हारी याद में आंसू कई गैलन!
अगर तुम फोन न करती तो यहां सैलाब आ जाता!
तुम्हारे नाम की चिट्ठियां तुम्हारे बाप ने खोली!
उसे उर्दू अगर आती तो वो कच्चा चबा जाता!
तुम्हारी बेवफाई से बना हूं टॉप का शायर!
तुम्हारे इश्क में पड़ता तो सीधा आगरा जाता!

जय वीरू

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