रचनाएँ

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

आज़ादी का गीत


हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ
इनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँ

परंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

चाँदी सोने हीरे मोती से सजवा छाते
जो अपने सिर धरवाते थे वे अब शरमाते
फूलकली बरसाने वाली टूट गई दुनिया
वज्रों के वाहन अंबर में निर्भय घहराते

इंद्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटे
छत्र हमारा निर्मित करते साठ कोटि करतल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

- हरिवंश राय बच्चन

3 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपको गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई ......

Mithilesh dubey ने कहा…

आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें ।

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

.... प्रभावशाली प्रस्तुति!!!!!

 

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