रचनाएँ

बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

मैं और मिसेज खन्ना


मैं और मिसेज खन्ना
अक्सर चाय पीते है
रोजाना शाम को
उस वक़्त भूल जाते है
हर किसी काम को
मौसम बदला वक़्त गुजरा
पर नहीं बदला हमारा चलन
युही चुसकिया लेते रहे हम

एक दिन सहसा
मेरा बेटा पास आया
चाय के वक़्त ही
उसने हमें डराया
वह बोला डेडी
कल चाय के वक़्त
मेरी शादी है जाना

मै घबराया और पूछा
बता रहा है या बुला रहा है
बेटा ये कैसा गजब ढाता है
तू भूल गया मै तेरा पिता
और ये तेरी माता है
भला अपनी शादी मै कोई
माँ बाप को ऐसे बुलाता है

तभी मन मै ख्याल आया
जमाना बदल रहा है
ये तो बुला भी रहा है
अब तो शायद .......


4 टिप्‍पणियां:

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

कौन हैं आप !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भाई शादी का न्योत मिल गया गनीमत है ....... आयेज आयेज पता नही क्या होने वाला है ........

psingh ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना
बहुत बहुत बधाई

numerology ने कहा…

होली की हार्दिक शुभ कामनाएं

 

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