चित्र प्रदर्शन

बृहस्पतिवार, 29 अप्रैल 2010

मेरी प्रेम कहानी


आज वही बस स्टॉप था, जिसके इस पार हम और उस पार वो खड़ी थी
हम भी नज़रें झुकाए खड़े थे और वो भी कुछ शरमाई लग रही थी
मेरी सोच एक उलझान में पड़ी थी,बोल ही दूंगा दिल की हर बात आज
ये हिम्मत काफी देर से दिल के साथ झगड़ रही थी

इतने में देखा एक आंटी जी ,हमारे सामने खड़ी थी
पूछने लगी बेटा पहचाना मुझे, मेरी मुंडी के इशारे में मुड़ी थी
बोली तेरी चचेरी मौसी हु मैं,ये कहते ही उनके चेहरे
की मुस्कान इंच और बड़ी थी

पर हमारा दिल तो उनक पीछे कड़ी उस लड़की के लिए धड़क रहा था
मौसी की हर बात इस धड़कन के शोर में गुम हो रही थी
इतने में मौसी जी बोली उस लड़की से, पीछे मत खड़े हो
आगे आओ अपने चचेरे भाई से मिलो

मौसी जी की इस बात को सुनकर ४४० वोल्ट का झटका लगा
प्यार का महल जो कुछ देर पहले बना था वो टूट गया
ऐसा लगा दो प्यार के पंछी मिलने से पहले बिछड़ गए
दिल रोया पर होठों पर मुस्कान खिल रही थी,
इतने में बस आई और वो दोनों चले गए

तभी हमारी नज़र उसी जगह पे पड़ी जहा कुछ
देर पहले हमारी पहली मोहब्बत खड़ी थी
अभी वहा एक और सुंदरी खड़ी थी
दिल में प्यार की नई कली खिल रही थी
दिल की ख़ुशी मुस्कान बनकर चेहरे पे खिल रही थी,
एक नई प्रेम कहानी करवट ले रही थी

आज वही बस स्टॉप था, जिसके इस पार हम और
उस पार वो खड़ी थी


-रिमी शर्मा

 

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