रचनाएँ

मंगलवार, 15 मई 2012

मुर्गी भी माँ है !

सड़क..
कसाई की दुकान
पिंजरे में मुर्गे
चाकू से डरते!
ग्राहक की आमद,
मुर्ग़ों की शामत..
जान सबको प्यारी है,
कोने में छुपने की जंग 
बाक़ायदा ज़ारी है!
आवाज़ आई
"एक किलो"
दुबक जाओ कोने में
बच लो!
मोटा वाला छुप रहा है,
कसाई का हाथ
ढूँढ रहा है
ये...
पकड़ाया
वो फड़फ़ड़ाया,
चिल्लाया,
पंखों को पकड़ा 
टेंटुआ दबाया
आँसू भी नही निकले
तराज़ू के पलड़े
हिलने लगे!
ख़ैर..
उसे तोला,
कम्बख़्त डेढ़ किलो का निकला!
मोटे की जान में जान आई
पर पतले पर,
काल की छाया छाई|


यह तो सब ठीक
वहाँ दूर एक मुर्गी,
ख़ून के आँसू रोती है..
माँ है,
अपने बच्चों को
रोज़ कटने जाते देखती है!
देवकी की छह संतानें मरीं 
तो भगवान ख़ुद जन्मे,
पर यह जानवर है
बेज़ुबान..
इसकी पीड़ा कौन सुने?
मुझे चोट लगे 
तो माँ बेचैन जाती है
और इसके बच्चों से भरी गाड़ी
रोज़ शहर जाती है!
बेचारी.. 
अंडे देती है,
सेती है,
दुलारती है
तब चूज़े निकलते है
बेरहम दुनिया खा जाती है!
आह!
कैसी विडंबना..
वो बोल नही सकती
वरना ज़रूर बोलती
महज़ स्वाद के लिए
मेरे बच्चों को मत मारो,
तुम भी किसी के बेटे होगे
मेरी ममता को,
यूँ छुरियों से ना काटो..
अरे इंसानों !
मुझ पर रहम करो
छोड़ दो माँसाहार
बस शाकाहार करो..



6 टिप्‍पणियां:

सुज्ञ ने कहा…

एक माँ की करूण व्यथा!! मर्मान्तक!!
साधुवाद इस हृदय स्पर्शी रचना के लिए!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

रहम! रहम!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

amrata ने कहा…

bahut badiya ek maa hi maa ka dard janti he . fhir bhi nonvege khane walo ke yaha maa hi use banti he khati he or khialti he. aapki kavita se unko kuch sochana chaiye

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

पशु पक्षियों की मूक पीड़ा का मानवीकरण करती रचना ,माँ की करुणा ममता से आ जुडती है .मुहावरे भी कितने अटपटे हैं :मुर्गी जान से गई मियाँ की जान अलोनी ही रही /घर की मुर्गी दाल बराबर ...शाकाहार से ही जुडी है सम्पूर्ण स्वास्थ्य की नव्ज़ ,मांसाहार रोगों की जड़ है हिंसा का जनक है .मांसाहार एक मानसिक हिंसा है थाली में .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle
Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle

Reducing symptoms -correcting the cause.

गर्दन में दर्द होने पर अमूमन आप दवाओं की शरण में चले आतें हैं लेतें हैं आप एस्पिरिन ,तरह तरह के अन्य दर्द नाशी ,विशेष पैन पिल्स ,इस दर्द के लक्षणों के शमन के लिए लेतें हैं आप मसल रिलेक्सर्स ,मालिश ,हॉट पेक्स .

लेकिन गर्दन में दर्द की वजह न तो एस्पिरिन की कमी बनती और न अन्य दवाओं की .

शालिनी कौशिक ने कहा…

jab insan insan ko hi nahi chhod raha to murgi ko kya chhodega .nice presentation.

 

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