अभी अभी मेरे दिल में ये सवाल आया है




अभी अभी मेरे दिल में ये सवाल आया है
ये कैसी जिंदगी जिसमें मौत का साया है
क्या लेकर आये थे हम इस दुनिया में
जो कुछ है पास हमारे यही पर कमाया है
         अभी अभी मेरे दिल में--------

रोज़ी रोटी के चक्कर में दुनियादारी भूल गये
दौलत के लालच में जाने कितनो को सताया है
क्या अपना क्या तेरा है ये हमें मालूम नहीं
अपने को ही हमने सदा सच्चा बताया है
         अभी अभी मेरे दिल में--------

अपने खाने की याद रही औरों को हम भूल गये
जाने किसने जाने कबसे कुछ भी नहीं खाया है
सच्चाई क्या होती है इसकी हमे खबर नहीं
बस यही कहते रहते है ये सब उसकी माया है
         अभी अभी मेरे दिल में--------

रात गयी और बात गयी हो गयी है अब सुबह नयी
गमो की इन बरसातों में भी गीत ख़ुशी का गया है
जड़ छोड़कर चेतन बन जा बरना पाछे पछतायेगा 
मिल जाएगी मिटटी में ये तेरी कंचन काया है
         अभी अभी मेरे दिल में--------

चोरी डाका झूठ फरेब भरने लगा तू अपनी जेब 
अत्याचारी बनकर तुने क्या मानव धर्म निभाया है
मानव जन्म लिया है तो कुछ मानवता भी दिख्लादे 
भूल गया तू इस दुनिया में किसलिए आया है 
         अभी अभी मेरे दिल में--------


मन का मन का मीत





मीत मिला ना मन का 
मन का मिला ना मीत 
छेड़ो राग प्यार का 
गाओ ख़ुशी के गीत 


किसी मोड़ पर मिल जायेगा 
गर होगी सच्ची प्रीत 
हार से मत घबरा प्यारे
हार के आगे ही है जीत 

मिलना है तो मिल जायेगा 
यही है दुनिया की रीत 
मिल जायेगा मिल जायेगा
सबको मन का मीत 

मुर्गी भी माँ है !

सड़क..
कसाई की दुकान
पिंजरे में मुर्गे
चाकू से डरते!
ग्राहक की आमद,
मुर्ग़ों की शामत..
जान सबको प्यारी है,
कोने में छुपने की जंग
बाक़ायदा ज़ारी है!
आवाज़ आई
"एक किलो"
दुबक जाओ कोने में
बच लो!
मोटा वाला छुप रहा है,
कसाई का हाथ
ढूँढ रहा है
ये...
पकड़ाया
वो फड़फ़ड़ाया,
चिल्लाया,
पंखों को पकड़ा
टेंटुआ दबाया
आँसू भी नही निकले
तराज़ू के पलड़े
हिलने लगे!
ख़ैर..
उसे तोला,
कम्बख़्त डेढ़ किलो का निकला!
मोटे की जान में जान आई
पर पतले पर,
काल की छाया छाई|


यह तो सब ठीक
वहाँ दूर एक मुर्गी,
ख़ून के आँसू रोती है..
माँ है,
अपने बच्चों को
रोज़ कटने जाते देखती है!
देवकी की छह संतानें मरीं
तो भगवान ख़ुद जन्मे,
पर यह जानवर है
बेज़ुबान..
इसकी पीड़ा कौन सुने?
मुझे चोट लगे
तो माँ बेचैन जाती है
और इसके बच्चों से भरी गाड़ी
रोज़ शहर जाती है!
बेचारी..
अंडे देती है,
सेती है,
दुलारती है
तब चूज़े निकलते है
बेरहम दुनिया खा जाती है!
आह!
कैसी विडंबना..
वो बोल नही सकती
वरना ज़रूर बोलती
महज़ स्वाद के लिए
मेरे बच्चों को मत मारो,
तुम भी किसी के बेटे होगे
मेरी ममता को,
यूँ छुरियों से ना काटो..
अरे इंसानों !
मुझ पर रहम करो
छोड़ दो माँसाहार
बस शाकाहार करो..



shri Panch kalyank Pratishta mahotsav


सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में दिनांक २४ फरवरी से १००८ श्री शांतिनाथ भगवान के पंच्कल्यांक एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ....जिसमे आप सभी सपरिवार, इष्ट मित्रो के साथ सादर आमंत्रित है ....

हाय ये किस्मत!


कल रात मेरा सोना 
हराम हो गया...
पानी में वो भीगी, 
मुझको  जुकाम हो गया...

मेरे प्यार का कैसे  
इजहार हो गया...
मच्छर ने उसे काटा 
और मै बीमार हो गया...

पढ़ते- पढ़ते वो 
इस जिंदगी से हताश हो गई...
पढ़ाई हमने की 
और पास वो हो गई...

हाय ये किस्मत, 
ये कैसा खेल हो गया...
मस्ती उसने मारी 
और फैल मैं हो गया..

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