शुक्रवार, 7 मई 2010

इक लड़की को हो गया है प्यार !!!


पहले देख कर छुपाती थी वो
अबके छुप - छुप कर देखती है वोह
वोह दौर था बचपन का

यह दौर है जवानी का
मन ऊसका सुमन
तन ऊसका सुकोमल
चहेरा माहताब
कभी अपने हाथ से अपनी
ऊंगलियों को छूती है
तो कभी आईने में देख खुद को;
खुद से ही शर्माती है

अब तो शाम का रंग बिरंगी आसमान भी
उसे लुभाने लगा है
रात को आसमान के तारे गिनती है वोह
जिसे तोड़ लाने की बात कही है किसीने
देख चाँद को; चौकती है वोह
मुस्कराती है और छुपा लेती है
अपने आपको रात के आगोश में वोह
रात को नींद में तकिये को
आगोश में ले लेती है, और फिर
अचानक आधी रात को नींद खुलते ही
देख तकिए को मूस्कुराती है
फिर इक सुखद नींद में सो जाती है

इक लड़की को हो गया है प्यार ............. !!!!

6 टिप्‍पणियां:

महफूज़ अली ने कहा…

Very Good...

Sonal Rastogi ने कहा…

nice poem ..like it

pankaj mishra ने कहा…

kya kahne. ladki se pyar ho gaya.

Rahul Singh ने कहा…

लगा कि यश चोपड़ा के फिल्‍म दृश्‍य में पृष्‍ठभूमि से आवाज आ रही हो.

Parul ने कहा…

ohho..kya baat hai1

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्या बात है ......!!

बेहद खूबसूरत .....!!

@ जिसे तोड़ लाने की बात कही है किसी ने .....

@ देख तकिये को मुस्कुराती है वो ......

अद्भुत .....!!

 

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