रचनाएँ

शनिवार, 19 सितंबर 2009

दीप जलाओ


शिक्षा का शुभ दीप जलाओ।
संस्कृति से अज्ञान भगाओ।।
शिक्षा का सब दीप जलाओ,
ज्ञान प्रकाश सभी फैलाओ।
रहे न कहीं निरक्षरता-तम,
रहे न कोई अशिक्षित, अक्षम।
पढ़ो स्वावलम्बी बन जाओ।
शिक्षा का शुभ दीप जलाओ।।
जग में वही सर्व सुन्दर है,
ज्ञान-ज्योति जिसके अन्दर है।
वही श्रेष्ठ है, वही प्रेष्ठ है,
जोकि ज्ञान विज्ञान ज्येष्ठ है।
पढ़कर सदा मानधन पाओ।
शिक्षा का शुभ दीप जलाओ।।
जो नर-नारि अपढ़ होते हैं,
निज सम्मान सदा खोते हैं।
वे समाज में सुयश न पाते,
लज्जित होते हैं लजियाते।
पढ़कर जीवन सफल बनाओ।
शिक्षा का शुभ दीप जलाओ।।
शिक्षित है समाज में ऊँचा,
उससे बढ़कर कोई न दूजा।
शिक्षित के झण्डे लहराते,
शिक्षित सदा उच्चपद पाते।
पढ़ो, जगत् में सुयश कमाओ।
शिक्षा का शुभ दीप जलाओ।।

1 टिप्पणी:

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है जै हिन्दी जै भारत्

 

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