सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

तेरे बिन

तनहा तनहा
रात गुजारी,
तनहा तनहा दिन

खयालो में ही
खोया रहता हूँ,
सारा सारा दिन

नहीं सह सकता
विरह की पीडा
हर पल छिन

अब तो आजा
ओ हरजाई,
नहीं लगता दिल
तेरे बिन

5 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

wo aayegi jarror aayegi

Nirbhay Jain ने कहा…

आ जाए तो अच्छा है
वरना इन्तजार में
कट जायेगें दिन....... तेरे बिन


दिलासा देने के लिए धन्यबाद!!!!

SACCHAI ने कहा…

" vo aaayegi jaroor raat ki tanhai me "

" bahut hi acchi rachana ke liye aapko badhai ."

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Nirbhay Jain ने कहा…

mere hote huye aab kiska intajar he aapko kyonji............................
hume pata hi nahi he
bahut hi achi rachna he whaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa;;;;;;;;;;;;;;;;;
AMRATA JAIN

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा आमंत्रण..बढ़िया रचना.

 

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