सोमवार, 30 नवंबर 2009

हमारे नेताओ की परिभाषा

आज के नेता साँपनाथ,
कल आयेंगे नागनाथ

कुर्सी की बाँबीयों में
बस साँप ही रहे
इन्साँ कहे न इनको,
बस नाग ही कहे

नेता बुझा रहे हैं,
खुशहाली का दिया
इनके गरल को देश ने
है कंठ तक पिया
कल रात लगा फांसी
इक वेश्या मरी
किसी मनचले ने उसको
नेता था कह दिया

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

क्या कहने, सही निशाना साधा

दिगम्बर नासवा ने कहा…

GAZAB KA KATAAKSH HAI ....

 

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